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सूरज और मै

मै आज भी कश्मकश में हु,

सो जाता है जहाँ, जागता सूरज

दिन रात , कभी यहाँ कभी वहाँ

वो भी बिना थके, बिना हारे

धरती के जनम से ।


मै सूरज का मुरीद,

और लोग कहे मुझे पागल

सूरज की आज भी पूजा

और मुझे जन्मो की सजा


सब रोशनी से चकाचौंद मुबारक

और मै अंधेरे की आरज़ू में

बेकार का फ़सा पड़ा

सूरज भी रोज़ हँसता

और मै जन्मो का प्यासा कुवाँ


वक्त भी हरामी सूरज का ग़ुलाम

शहेनशाह ए आलम, ज़िंदगी को सलाम

कश्मकश ही जन्नत ए ज़िंदगी

कभी इसको, तो कभी वुसको सलाम


मुबारक *अंजाना*


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मुबारक की मधुशाला

जिने के लिये बहुत कूछ दर्द उठाता ये भोला बाला, कैसे जिना, कैसे मरना एक प्रश्न कि माला, सब प्रश्नो को निचोड कर लाया मै हालां, कम्बखत जवाबो से कई सवाल उटाती मधुशाला ।। चाहे हो चाय या मधु का हो प्याला ,

2件のコメント


Hemant Lahoti
Hemant Lahoti
2021年9月21日

बढिया हैं भाई 👏👏👏

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Dr Mubarak khan
Dr Mubarak khan
2021年9月23日
返信先

Thank you bro 🙏💐

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