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इंसान.., मजबूर इंसान


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मुबारक की मधुशाला

जिने के लिये बहुत कूछ दर्द उठाता ये भोला बाला, कैसे जिना, कैसे मरना एक प्रश्न कि माला, सब प्रश्नो को निचोड कर लाया मै हालां, कम्बखत जवाबो से कई सवाल उटाती मधुशाला ।। चाहे हो चाय या मधु का हो प्याला ,

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